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Poetry 4.8 / 5.0
Pre-Order Available•Official Launch: November 2026
चुप मत रहा करो
ये किताब उन खामोशियों की है, जो बोलना चाहती थीं...
By Anant Yadav
About the Book
कुछ बातें जो कभी कह नहीं पाए, वो शब्द बनकर इस किताब में चले आए हैं... ये किताब उन खामोशियों की है, जो बोलना चाहती थीं, उन लम्हों की है, जो ठहर गए थे कहीं, और उन एहसासों की है, जो अब शब्द बनकर तुम तक पहुँच रहे हैं।
चुप मत रहा करो उन भावनाओं की किताब है जो अक्सर शब्दों तक पहुँचने से पहले ही ख़ामोशी में खो जाती हैं। यह प्रेम, दूरी, इंतज़ार, अधूरे रिश्तों और उन बातों की कहानी है जिन्हें हम कहना चाहते हैं, लेकिन किसी डर, झिझक या परिस्थिति के कारण कह नहीं पाते।
कभी किसी अपने की ख़ामोशी बहुत कुछ कह जाती है, और कभी वही ख़ामोशी रिश्तों के बीच ऐसी दूरी बना देती है जिसे बाद में शब्द भी मिटा नहीं पाते। यह किताब उन्हीं पलों को महसूस करने की कोशिश है—जहाँ एक आवाज़ की कमी, एक जवाब का इंतज़ार और एक अधूरी बात दिल में बहुत देर तक ठहरी रहती है।
शायद कुछ रिश्तों को बचाने के लिए बड़े वादों की नहीं, बस समय पर कहे गए कुछ सच्चे शब्दों की ज़रूरत होती है। क्योंकि जो बात आज कह सकते हैं, उसे कल के लिए छोड़ देना कभी-कभी सिर्फ़ ख़ामोशी नहीं होती-वह एक ऐसी कमी बन जाती है, जिसकी आवाज़ उम्र भर सुनाई देती रहती है
Author's Note
“ये किताब उन सभी खामोशियों को समर्पित है जो कभी लफ़्ज़ों में नहीं ढल पाईं। अगर कभी किसी बात को दिल में दबाए रखा हो, लेकिन कह न पाए हों—तो यह किताब आपकी अपनी आवाज़ बन जाएगी। — अनंत यादव”
Bibliographic Information
PublisherKathaankan publication
ISBN978-81-987654-0-1
Release DateNovember 2026 (Pre-order Available)
Pages168 Pages
LanguageHindi
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