ANANT YADAV
Poetics & Stanzas

Poetry Archive

Verses written in the quiet hours, exploring the geography of silence, time, and human vulnerability.

Themes:Confession Love Philosphical Contemporary
Confession 2 min

Why You?? Don't know

Confession

Pata nahi tumse yeh baat kaise kahun… Kuchh baatein hoti hain na, jinhe kehne se pehle insaan unhe bahut baar apne andar jee leta hai. Shayad main bhi kaafi waqt se laa raha hoon tumse kehne ki himmat. Mujhe tum achhi lagti ho. Why me? Yeh poochhogi toh shayad main chup ho jaaun. Kyunki tumhari koi ek baat nahi jo mujhe tumhari taraf kheenchti hai… Tumhara baat karna, tumhara achanak chup ho jaana, tumhari woh chhoti-chhoti baatein jinhe shayad tum khud bhi yaad nahi rakhti… Mujhe yaad reh jaati hain. Kabhi bina wajah yaad aati ho, kabhi kisi baat mein tumhari baat yaad aa jaati hai. Maine tumhe pasand karne ka kabhi koi faisla nahi liya tha. Na koi iraada tha, na koi wajah dhoondi thi. Bas pata hi nahi chala kab tumse baat karna achha lagne laga… Kab tumhari fikr hone lagi… Kab tumhari khamoshi bhi kuchh kehne lagi… Aur kab ek “tum” baaki sabse thodi si alag ho gayi. Shayad isi liye agar kabhi tum mujhse poochhogi- “Tumhe main hi kyun pasand hoon?” Toh main tumhe koi khoobsurat wajah nahi de paunga. Bas tumhari taraf dekhkar shayad itna hi keh paunga Pata nahi… Kuchh logon ko pasand karne ki wajah nahi hoti. Bas dil ko unka hona achha lagta hai. Aur mujhe… tumhara hona achha lagta hai.
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Love 1 min

तुम्हे पाओगे तुम

चुप मत रहा करो

मेरे जैसा कहाँ बन पाओगे तुम, जब किसी को दिल से चाहोगे तुम। फिर मेरी बातें याद आएँगी, जब रातों में अकेले मुस्कुराओगे तुम। बेचैनी तब समझ आएगी तुम्हें, जब किसी के इंतज़ार में ख़ुद को पाओगे तुम। मेरी ख़ामोशी समझने लगोगे, जब ख़ुद किसी के लिए चुप रह जाओगे तुम। मेरी लिखी ग़ज़लें पढ़ना कभी, ग़ज़लों में ख़ुद को ढूँढता पाओगे तुम। मैं उम्र भर उसी राह पर ठहरा रहूँगा, जिस राह से शायद कभी लौटकर न आओगे तुम। तुम्हें मेरा होना शायद कभी महसूस न हो, मगर मेरी हर दुआ में ख़ुद को पाओगे तुम। तुम्हें मुझसे इश्क़ हो या न हो, मेरी बेवजह मोहब्बत में ख़ुद को पाओगे तुम। और जब मेरी उम्र मेरी कलम से पूछेगी- “किसके इंतज़ार में लिख दी पूरी ज़िंदगी?” बस एक शेर और लिखूँगा, और उस शेर में ख़ुद से भी ज़्यादा, खुद को पाओगे तुम।
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Philosphical 2 min

शहर

अपनी झलक

शहर उसकी ऊँची इमारतों का नहीं, अधूरे ख़्वाबों का है। शहर उसकी भागती सड़कों का नहीं, ठहरे हुए सवालों का है। शहर उसकी भीड़ का नहीं, अकेले चेहरों का है। शहर उसकी रोशनियों का नहीं, अँधेरे कमरों का है। शहर उसकी आवाज़ों का नहीं, दबे हुए शोर का है। शहर उसकी मंज़िलों का नहीं, रोज़ बदलते रास्तों का है। शहर उसकी दुकानों का नहीं, खाली जेबों के हिसाब का है। शहर उसकी बारिश का नहीं, भीगते हुए काग़ज़ों का है। शहर उसकी सुबह का नहीं, रातभर जागती आँखों का है। शहर उसकी नींद का नहीं, कल की चिंता का है। शहर उसकी जीत का नहीं, हर रोज़ हारकर उठने का है। शहर उसकी दौड़ का नहीं, पीछे छूट जाने के डर का है। शहर उसकी पहचान का नहीं, पहचान बनाने की कोशिश का है। शहर उसके घरों का नहीं, घर तलाशते मुसाफ़िरों का है। शहर उसकी ख़ामोशी का नहीं, भीतर पलते तूफ़ानों का है। शहर उसकी कहानी का नहीं, हर चेहरे की अधूरी कहानी का है। शहर उसकी दूरी का नहीं, पास होकर भी अनजान रहने का है। शहर उसकी रात का नहीं, रात के बाद फिर सुबह करने का है। शहर उसकी थकान का नहीं, थककर भी चलते रहने का है। शहर उसकी मंज़िल का नहीं शहर उसके सफ़र का है।
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Love 2 min

इश्क़

चुप मत रहा करो

इश्क़ वो नहीं जो दुनिया को दिखाया जाए। इश्क़ वो है जो ख़ामोशी में निभाया जाए। इश्क़ वो नहीं जो हर तस्वीर में नज़र आए। इश्क़ वो है जो किसी की कमी में भी मुस्कुराए। इश्क़ वो नहीं जो हर वक़्त पास रहना चाहे। इश्क़ वो है जो दूरी में भी अपना हिस्सा निभाए। इश्क़ वो नहीं जो वादों की लंबी फ़ेहरिस्त बनाए। इश्क़ वो है जो एक छोटा-सा वादा उम्रभर निभाए। इश्क़ वो नहीं जो दुनिया से लड़ने की बातें करे। इश्क़ वो है जो मुश्किल वक़्त में हाथ न छोड़े। इश्क़ वो नहीं जो हर गलती को सही कह दे। इश्क़ वो है जो गलतियों के बीच भी इंसान को समझे। इश्क़ वो नहीं जो हमेशा अपना हक़ जताए। इश्क़ वो है जो सामने वाले की आज़ादी भी बचाए। इश्क़ वो नहीं जो कहानी को खूबसूरत बनाए। इश्क़ वो है जो कहानी मुश्किल होने पर भी टिक जाए। इश्क़ वो नहीं जो मिलने से पूरा हो जाए। इश्क़ वो है जो बिछड़कर भी बद्दुआ न बन पाए। इश्क़ वो नहीं जो किसी को अपना बना ले। इश्क़ वो है जो किसी को उसका अपना रहने दे। इश्क़ शायद कोई एहसास नहीं, इश्क़ शायद कोई वादा नहीं, इश्क़ शायद कोई मंज़िल भी नहीं इश्क़ बस एक रास्ता है ।
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Love 1 min

जाने दो

जाने दो

वो रुका नहीं, तो फिर किस बात का मलाल करूँ, जो जाना चाहता है, उसे क्यों बेहाल करूँ। ख़ुदा को भी नहीं मानता, कि उससे उसकी खैर मांगू, खैर वो जाना चाहता है तो जाने दो, उसकी ख़ुशी में मेरी खुशी है, अब उसकी खुशी है जाने में तो, उससे क्यों सवाल करू।
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Contemporary 1 min

आओ बैठ अनंत रंजिशें माफ़ करेंगे....

माफ़ कर दो

ख़फ़ा न हो हमसे, कब तक ये बेरुख़ी सहेंगे? बोलो भी, कब तक इस बे-ज़ार ख़ामोशी में रहेंगे l अगर दिल में कोई मलाल है, तो उसे ज़ुबाँ दो, यूँ चुप रहे तो फ़ासले दरमियाँ घर करेंगे। मोहब्बत तो बे-असर हो जाती है इस लंबी ख़ामोशी से, हम भी ज़िद पे आए तो रिश्ते ही बिखर जाया करेंगे। जो बात नहीं कोई, तो गुफ़्तगू का आग़ाज़ करेंगे, और गर है कोई रंजिश, तो आओ बैठ कर बात करेंगे। हसरत ही रह जाती होगी उन दिलों में जहाँ दूरियाँ बस्ती होंगी, हम तो हर हाल में राब्ता बहाल करेंगे। क्यों तन्हा से, बेचारे से, इस सन्नाटे में रहना? आओ आज फिर बैठ अनंत रंजिशें माफ़ करेंगे... दिल की गर्द साफ हो, तो फिर वो आरज़ू करेंगे, रंजिशें गर दूर हो जाएं, तो अनंत बात करेंगे।
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Contemporary 2 min

बताया करो

Special one

तुम बस अपनी पसंद बताया करो, मैं तुम्हारी हर पसंद को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाता जाऊँगा। तुम्हें हरा पसंद है, तो तुम्हारे लिए मौसम में हरियाली ढूँढ लाऊँगा, तुम्हें चूड़ियों की खनक अच्छी लगती है, तो तुम्हारी कलाई पर हर खुशी की आवाज़ सजा दूँगा, पायल पसंद है तो तुम्हारे कदमों के साथ चलती एक छोटी-सी धुन खरीद लाऊँगा। तुम्हें साड़ी पसंद है तो तुम्हें उसमें देखकर हर बार ऐसे ही ठहर जाऊँगा, तुम्हें चाँद अच्छा लगता है, तो हर रात तुम्हें उसकी तरफ़ देखकर ये कहने का बहाना दूँगा “देखो, आज फिर तुमसे कम खूबसूरत है।” तुम्हें फूल पसंद हैं, तो गुलदस्ता नहीं, तुम्हारी पसंद के फूलों का एक छोटा-सा मौसम ले आऊँगा। तुम्हें बारिश पसंद है, तो पहली बूंद पर तुम्हें याद करूँगा, और अगर तुम्हें भीगना अच्छा लगे, तो छतरी लेकर नहीं, तुम्हे साथ लेकर चलूँगा। तुम्हें मीठा पसंद है, तो हर मिठास तुम्हारे नाम कर दूँगा, और अगर तुम्हें चुप रहना पसंद हो, तो अपनी सारी बातें रोककर तुम्हारी खामोशी सुनूँगा। तुम बस अपनी पसंद बताती रहना, मैं तुम्हें बदलने की कोशिश नहीं करूँगा बस तुम्हारी पसंद की दुनिया में अपनी मोहब्बत की थोड़ी-सी जगह माँगता रहूँगा।
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चुप न रहा करो

Prem

तुम चुप न रहा करो, कुछ तो कहा करो, मन में जो भी हो, थोड़ा-सा ही but मुझसे साझा तो किया करो। हर बात पर रूठना ज़रूरी नहीं, पर कभी मुझसे लड़ भी लिया करो, ग़लती मेरी हो तो डाँट लिया करो, और तुम्हारी हो तो मुझसे छुपाया मत करो। हम इतने अपने हैं तो थोड़ा-सा हक़ भी जताया करो, कभी बिना वजह पूछ लिया करो “कहाँ हो?” कभी यूँ ही कह दिया करो “आज तुमसे बात करनी है।” मुझे तुम्हारी हर बात का जवाब नहीं चाहिए, बस तुम्हारी ख़ामोशी में अजनबी मत बनाया करो। जो बात दिल में अटक जाए, उसे रात भर मत रखा करो, लड़ लेना, झगड़ लेना, नाराज़ हो जाना बस यूँ बिना कुछ कहे दूर मत जाया करो। तुम चुप न रहा करो, कुछ तो बोला करो… लड़कर ही सही, मगर हर बार मुझे अपना होने का एक छोटा-सा हक़ तो दिया करो।
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सुकून-ए-दीदार

प्रेम

तुम्हारी एक झलक पे मुझे सुकून मिलता है, आओ कभी मिलकर एक नया जहां आबाद करते हैं। तुम्हारी हर बात से दिल को करार मिलता है, आओ कभी हम पास बैठ कर गूफ्तगू करते हैं। तुम्हारी एक खुशी में हम ख़ुद राफ्ता हो जाते हैं, आओ कभी की इस हंसी पे हम ऐतबार करते हैं। तुम्हारी ये झुमके साड़ी का शहर हमें बेताब करता है, तुम्हारी वो पुरानी बातें सुननी है,कैसी हो, आओ कभी सच में है हम गुम होने की आस करते हैं। सुनो है तुम्हारी शोखियाँ बढ़ती जा रही हैं आओ कभी हमें भी तुम्हारी उस तबस्सुम का शरीक ए हयात बनाना है। फ़क़त तमन्ना इतनी है कि आओ कभी मेरे आंखों का नूर और दिल के करार बनाने । देखा हमने तुम्हे रश्क-ए-क़मर हो तुम, आओ कभी अब दीदार-ए-महताब को और कितना तरसना है।......... (बस हसरत इतनी है कि तुम दिल की तस्कीन बन जाओ, छोड़कर चाँद को पीछे, मेरी आँखों का नूर-ए-यकीन बन जाओ।)
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