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Love
Miss you
Poetry
1 min read 2026-09-22
बात करने को बहुत कुछ है, मगर बात नहीं,
तेरे बिन अब किसी शाम में वो बात नहीं।
पहले हर छोटी खुशी तुझसे बाँट लेते थे,
अब ख़ुशी है भी तो पहले जैसी बात नहीं।
तेरी आदत-सी थी, इसलिए कमी लगती है,
वरना हर शख़्स की यूँ याद तो आती नहीं।
कभी घंटों जो गुज़रते थे तेरी बातों में,
अब कई दिन भी गुज़र जाएँ, मुलाक़ात नहीं।
फ़ोन हाथों में लिए बैठा रहता हूँ अक्सर,
नाम तेरा तो दिखे, पर कोई बात नहीं।
मैंने माना कि तुझे भूलना आसान होगा,
पर ये दिल मानता है—ऐसी कोई बात नहीं।
तू अगर पूछे कभी, “याद है मैं अब भी तुझे?”
मैं हँस दूँगा… मगर आँखें ये कहती हैं—नहीं।
कुछ रिश्ते ख़त्म कहाँ होते हैं ख़ामोशी से,
बस आवाज़ नहीं रहती, मगर याद जाती नहीं।
— Anant Yadav
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