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वो मेरी दोस्त थी
Chup mat raha karo
2 min read 2026-08-05
वो मेरी दोस्त थी
बस एक दोस्त…
लेकिन न जाने कब
उसकी बातों में सुकून ढूँढते-ढूँढते
मुझे उससे मोहब्बत हो गई।
ऐसी मोहब्बत,
जिसका कोई इरादा नहीं था,
ऐसा कोई वादा नहीं था
बस धीरे-धीरे
वो मेरी आदत से मेरी ज़रूरत बन गई।
फिर एक दिन
दिल ने हिम्मत जुटाई,
और मैंने अपने भीतर छुपा वो सच
उसके सामने रख दिया
“मुझे तुमसे मोहब्बत है।”
कुछ पल ख़ामोशी रही…
फिर होना क्या था,
कुछ नहीं।
शायद उसकी ख़ामोशी ही
उसका जवाब थी।
मैं इंतज़ार करता रहा
कि शायद वो कुछ कहेगी,
शायद मेरी मोहब्बत को समझेगी,
शायद कहेगी
“मुझे भी…”
मगर वो “शायद”
कभी हक़ीक़त नहीं बन पाया।
उसका जवाब नहीं आया,
लेकिन उसके बाद
उसका होना भी
धीरे-धीरे कम हो गया।
बातें बंद हो गई,
मुलाक़ातें बंद हो गई,
और फिर एक दिन
हमारे बीच सिर्फ़
पुरानी यादें रह गईं।
मैंने उसे खोया नहीं था…
मैंने तो बस
अपने दिल की बात कही थी।
मगर शायद
कुछ सच रिश्तों को बचाते नहीं,
उन्हें बदल देते हैं।
जिस दोस्ती को
मैं उम्रभर संभालकर रखना चाहता था,
वही दोस्ती
मेरी मोहब्बत के सामने
दम तोड़ गई।
और फिर…
न वो मेरी दोस्त रही,
न मेरी मोहब्बत।
बस एक कहानी रह गई
जिसमें मैंने दिल से चाहा,
उसने ख़ामोशी से सुना,
और हमारी पूरी दुनिया
बिना किसी अलविदा के
ख़त्म हो गई।
— Anant Yadav
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