ANANT YADAV
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Love

क्यों रुकूं

चुप मत रहा करो

2 min read 2026-09-16
क्यों रुकूँ? उसकी मुस्कान पर रुकूँ, या उसकी आवाज़ में ठहर जाऊँ, उसकी आँखों में छुपे उस राज़ को देखूँ, या उसकी ख़ामोशी को पढ़ता जाऊँ? क्यों रुकूँ? उसकी बातों के लिए रुकूँ, या उसके हाथों की उस छुअन के लिए, उन मुलाक़ातों को फिर से जीने के लिए, या उन अधूरी चाहतों के लिए? क्यों रुकूँ? उन ख़ामोशियों के लिए जिनमें भी बहुत कुछ कहा था, या उन अधूरे वादों के लिए जिन्हें हमने कभी पूरा समझा था? क्यों रुकूँ? उन सुबहों के लिए जो कभी उसके नाम से शुरू होती थीं, या उन शामों के लिए जो उसकी यादों में ढलती थीं? क्यों रुकूँ? उन छोटी-सी बातों के लिए जिन पर घंटों मुस्कुराया था, या उन छोटी-सी लड़ाइयों के लिए जिनके बाद फिर उसे मनाया था? क्यों रुकूँ? उस एहसास के लिए जिसे शब्द कभी कह नहीं पाए, या उन पलों के लिए जो चाहकर भी लौटकर नहीं आए? क्यों रुकूँ? उसके मेरे पास होकर भी मुझसे दूर हो जाने के लिए, या उसे भूलने की कोशिश में हर रोज़ और याद करने के लिए? क्यों रुकूँ? लोग कहते हैं, वक़्त सब कुछ बदल देता है। शायद बदल भी देता होगा… मगर वो वक़्त के साथ नहीं बदला, वो ख़ुद वक़्त बन गया, तो… क्यों रुकूँ? किसी रास्ते पर नहीं, किसी मोड़ पर नहीं, किसी बीते हुए कल में नहीं मैं रुकूँगा तो बस उसकी याद में ।

— Anant Yadav

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